Aaj Ka Panchang 17 September 2025: जानें! आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त, योग और तिथि… - Balaji 36 News

Aaj Ka Panchang 17 September 2025: जानें! आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त, योग और तिथि…


Aaj Ka Panchang 17 September 2025: 17 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन कई प्रमुख पर्व और व्रत पड़ रहे हैं।

विशेष पर्व और व्रत

  • विश्वकर्मा जयंती
  • इंदिरा एकादशी
  • एकादशी श्राद्ध
  • कन्या संक्रांति

इंदिरा एकादशी व्रत

इस तिथि को भगवान विष्णु की विशेष पूजा का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विष्णुजी को तुलसी दल के साथ खीर का भोग लगाने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

एकादशी श्राद्ध

महालय पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी पर पितरों के तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस दिन चावल की जगह मखाने की खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

विश्वकर्मा जयंती

विश्वकर्मा भगवान को ब्रह्मांड का शिल्पकार माना जाता है। इस अवसर पर कार्यस्थलों, मशीनों और औजारों की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्यों में उन्नति और समृद्धि मिलती है।

कन्या संक्रांति

इस दिन सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है।

17 सितंबर 2025 का पंचांग

पंचांग विवरण

तिथि: एकादशी (सुबह 12:21 से रात 11:39 तक)

वार: बुधवार

नक्षत्र: पुनर्वसु

योग: परिघ

चंद्र राशि: कर्क

सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रमा

सूर्योदय: सुबह 5:57 बजे

सूर्यास्त: शाम 6:48 बजे

चंद्रोदय: रात 2:32 बजे

चंद्रोस्त: दोपहर 3:53 बजे

चौघड़िया मुहूर्त

सुबह का चौघड़िया:

लाभ: 06:04 – 07:37

अमृत: 07:37 – 09:11

शाम का चौघड़िया:

शुभ: 07:59 – 09:25 रात

राहुकाल और अशुभ समय

राहुकाल: 12:15 – 01:47 दोपहर (शुभ कार्य वर्जित)

यमगंड काल: 07:39 – 09:11 सुबह

गुलिक काल: 10:43 – 12:15 दोपहर

विडाल योग: 06:07 – 06:26 सुबह

किन राशियों को लाभ मिलेगा

तुला राशि: घर में शुभ और मांगलिक कार्य होने की संभावना है। नया वाहन या संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं।

किन राशियों को सावधान रहना चाहिए

मिथुन राशि: घर-परिवार की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

आज का उपाय

इंदिरा एकादशी होने के कारण भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ खीर का भोग लगाएं। पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध में मखाने की खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।


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