भारतीय सांस्कृतिक निधि दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा हेरिटेज क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन - Balaji 36 News

भारतीय सांस्कृतिक निधि दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा हेरिटेज क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन


भारतीय सांस्कृतिक निधि दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा शालेय विद्यार्थियों को भारत के समृद्ध संस्कृति और इतिहास से अवगत कराने के लिए हेरिटेज क्विज प्रतियोगिता का आयोजन श्री शंकराचार्य विद्यालय, हुडको, भिलाई में किया गया। इस आयोजन के मुख्य अतिथि के रुप में डॉ. डीएन शर्मा पूर्व संयोजक दुर्ग-भिलाई इकाई तथा सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के दुर्ग संभाग के संयोजक उपस्थित थे तथा मुख्य वक्ता श्री गोविन्द पटेल छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चंदुलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित एवं धर्मधाम गौरव गाथा समिति धमधा के संयोजक थे। विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री अमिताभ दास प्राचार्य, श्री शंकराचार्य विद्यालय, हुडको, भिलाई, एवं इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय कि संयोजक तथा प्राचार्य स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई डॉ. हंसा शुक्ला उपस्थित हुये।

कार्यक्रम के प्रारंभ में इन्टैक दुर्ग-भिलाई अध्याय के सदस्य डॉ. रजनी नेल्सन ने अतिथियों का स्वागत पौधे देकर किया। इन्टैक दुर्ग-भिलाई अध्याय कि संयोजक डॉ. हंसा शुक्ला ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इन्टैक का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक विरासत, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एवं अपनी संस्कृति धरोहरों का संरक्षण करना एवं उनका रखरखाव करना है। छत्तीसगढ़ कि सभी इंटैक इकाईया यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर, इतिहास एवं विरासत को बचाने का प्रयास कर रही है उन्होंने कहा कि जब हम हर क्षेत्र में खोज कर रहे है तो विद्यार्थियों को जागृत रहना होगा न केवल राष्ट्रीय धरोहर बल्कि अपने छत्तीसगढ़ की संस्कृति बचाने में भी अपना योगदान देना होगा। मुख्य अतिथि डॉ. डीएन शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा हमारा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत बहुमूल्य है। धरोहर मुख्यतः तीन प्रकार के होते है – सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक धरोहर, अमूर्त धरोहर। सांस्कृतिक धरोहर में अचल धरोहर जिसमे ईमारत, ऐतिहासिक स्थान एवं स्मारक शामिल है चल धरोहर में ग्रन्थ दस्तावेज, कलाकृतियां, संगीत आदि शामिल है। प्राकृतिक धरोहर में वनस्पतियों एवं जीवों सहित ग्रामीण इलाके एवं पर्यावरण शामिल है। अमूर्त धरोहर में संस्कृति विशेष के गैर भौतिक पहलु जैसे मूल्य एवं परम्पराएँ, रीति-रिवाज एवं प्रथाए, भाषा और मानव गतिविधि के अन्य पहलु शामिल है। विद्यार्थी इस क्विज के माध्यम से अपने धरोहरों को जन पाएंगे एवं उसे संरक्षित रखने के लिये दृढ संकल्पित होंगे।


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