जहाँ बंदूकें खामोश हुईं, वहाँ रखी जा रही भविष्य की नींव, 35 आत्मसमर्पित नक्सली बने राजमिस्त्री

सुकमा।  कभी जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में औज़ार हैं। कभी जिन रास्तों…