CG : बड़े भाई ने लगाई डांट, तो 10 वर्षीय बच्ची ने फांसी लगाकर दे दी जान - Balaji 36 News

CG : बड़े भाई ने लगाई डांट, तो 10 वर्षीय बच्ची ने फांसी लगाकर दे दी जान


दुर्ग। जिले के जामुल थाना क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां गणेश नगर वार्ड-5 में रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची गुरप्रीत कौर ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जानकारी के अनुसार, गुरुवार 19 मार्च की शाम को खुशी का अपने बड़े भाई से किसी बात पर विवाद हुआ था। भाई की डांट से क्षुब्ध होकर चौथी कक्षा की इस छात्रा ने कमरे में जाकर आत्मघाती कदम उठा लिया।

घटना के समय घर में कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था; पिता पेशे से ड्राइवर हैं और मां ब्यूटी पार्लर गई हुई थीं। शोर सुनकर जब पड़ोसी और परिजन पहुंचे, तो बच्ची को तुरंत भिलाई के बीएम शाह अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। खुशी स्वामी आत्मानंद स्कूल जामुल की छात्रा थी। शुक्रवार को गमगीन माहौल में बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल जामुल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

“क्या हो रहा है बच्चों को?”: बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने खड़े किए गंभीर सवाल

देशभर में बच्चों और किशोरों के बीच आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने समाज और परिवारों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ाई का बढ़ता दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक अपेक्षाएं और अकेलापन बच्चों पर मानसिक रूप से भारी पड़ रहा है। कई मामलों में बच्चे अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे वे अंदर ही अंदर तनाव से जूझते रहते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों में अवसाद (डिप्रेशन), चिंता और असफलता का डर तेजी से बढ़ रहा है। खासकर परीक्षा के समय या रिजल्ट के दौरान यह दबाव और अधिक बढ़ जाता है, जिससे कुछ बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि माता-पिता को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चा चुप रहने लगे, अकेले समय बिताने लगे या अचानक गुस्सा या उदासी दिखाने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह किसी मानसिक परेशानी से गुजर रहा है।

सरकार और स्कूलों को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, जैसे काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करना और बच्चों के लिए एक सुरक्षित व संवादात्मक माहौल तैयार करना।


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