छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: धर्मांतरण पर सख्त कानून, अवैध परिवर्तनों पर कड़ी सजा और जुर्माना - Balaji 36 News

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: धर्मांतरण पर सख्त कानून, अवैध परिवर्तनों पर कड़ी सजा और जुर्माना


रायपुर। प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से जारी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच गुरुवार को साय सरकार ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश कर दिया। संभावना है कि बजट सत्र के अंतिम दिन इसे सदन द्वारा पारित भी कर दिया जाएगा।

विधेयक वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 का स्थान लेगा। पुराने कानून में धर्मांतरण के बाद केवल जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देने का प्रावधान था, और जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय अपराध माना गया था। समय और तकनीकी बदलाव के साथ वर्तमान परिदृश्य में 1968 का कानून पर्याप्त नहीं रहा, इसलिए नए विधेयक के माध्यम से व्यापक प्रावधान लागू किए जा रहे हैं।

विधेयक में कुल छह अध्याय और 31 बिंदु हैं, जो वैध और अवैध धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

अवैध धर्मांतरण पर सजा: 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना।

संवेदनशील समूह (नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग): 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना।

सामूहिक धर्मांतरण: 10 साल से आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना।

अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।

विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झूठ, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण अवैध होगा। स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी, जिसे सार्वजनिक रूप से 30 दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा ताकि आपत्ति दर्ज की जा सके।

इसके अलावा, विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की स्थिति में, समारोह आयोजित करने वाले पादरी, फादर, मौलवी या अन्य धार्मिक अधिकारी विवाह की तारीख से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणा पत्र प्रस्तुत करेंगे। प्राधिकारी तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है।

विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही, पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *