एसआईआर पर वोरा का बड़ा बयान : कहा – बीएलओ पर अत्यधिक दबाव, आम जनता परेशान - Balaji 36 News

एसआईआर पर वोरा का बड़ा बयान : कहा – बीएलओ पर अत्यधिक दबाव, आम जनता परेशान


पूर्व विधायक अरुण वोरा ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। वोरा ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दिक्कत उन बीएलओ को हो रही है, जो दिन-रात अत्यधिक दबाव, अव्यवहारिक समय-सीमा और लगातार बढ़ते टार्गेट्स के बीच काम कर रहे हैं। कई राज्यों में बीएलओ की मौतों के दुखद मामले सामने आ चुके हैं, ऐसे समय में कांग्रेस पूरी प्रतिबद्धता के साथ यह प्रयास कर रही है कि यह प्रक्रिया नागरिकों के लिए जितनी संभव हो सके उतनी आसान, सुगम और सुरक्षित बने।
वोरा ने कहा कि हमारे बीएलए-02 सदस्यों और कार्यकर्ताओं की टीमें घर-घर जाकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी नागरिक दस्तावेज़ों की कमी या प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण मताधिकार से वंचित न हो। बीएलओ और नागरिक दोनों ही इस प्रक्रिया की रीढ़ हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कांग्रेस हर स्तर पर ग्रामीण व शहरी इलाके में यह लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेगी, ताकि कोई भी नागरिक अपनी पहचान और मताधिकार खोने से बच सके।
वोरा ने चिंता जताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया जनता के जीवन को आसान बनाने के बजाय और अधिक उलझनभरी व कष्टदायक सिद्ध हो रही है। पहली बार मतदाता सूची में नाम जोड़ने हेतु इस स्तर की दस्तावेज़ीय कठोरता लागू की गई है, जहाँ आम नागरिक पूरी तरह भ्रमित और परेशान है।
वोरा ने कहा कि वर्तमान कार्यक्रम के अंतर्गत बीएलओ को 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर – घर जाकर SIR फॉर्म वितरित करना है और मतदाताओं के गणना फार्म जमा करने के बाद डिजिटाइजेशन करना है। 2003 के बाद पहली बार इस स्तर का SIR किया जा रहा है। वोरा ने सवाल किया कि आखिर किस दबाव में इतनी जल्दबाज़ी में व्यापक मतदाता पुनरीक्षण पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है?
वोरा ने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर जनता को पर्याप्त जानकारी ही उपलब्ध नहीं कराई गई। बहुत से नागरिकों को यह तक नहीं पता कि उन्हें कौन-सा फॉर्म भरना है, कौन-से दस्तावेज़ देने हैं, या उन पर कौन-सी श्रेणी लागू होती है। बीएलओ की संख्या सीमित है, जबकि उन पर 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं तक पहुँचने की भारी जिम्मेदारी डाल दी गई है। जब जानकारी और पारदर्शिता ही अधूरी है। त्रुटिरहित और निष्पक्ष मतदाता सूची कैसे तैयार होगी ?
वरिष्ठ नेता ने कहा कि पुनरीक्षित मतदाता सूची सीधे 2028 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करेगी। इसलिए सूची का सटीक, निष्पक्ष और पूरी तरह त्रुटिरहित होना अत्यंत आवश्यक है। जल्दबाज़ी में इस प्रक्रिया को पूरा करने से लाखों लोग मतदाता सूची से वंचित हो सकते हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार होगा।
कई ऐसे मतदाता हैं जिनका नाम 20–25 वर्षों से सूची में दर्ज है, फिर भी उन्हें अब नए प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण निश्चित रूप से आवश्यक है। लेकिन प्रक्रिया सरलीकृत,सुलभ और नागरिक सम्मान के साथ लागू होनी चाहिए।


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