Ayodhya Priest Salary: जानें कैसे बनते हैं राम मंदिर के पुजारी और कितनी मिलती है इन्हें सैलरी? जानकर रह जाएंगे दंग - Balaji 36 News

Ayodhya Priest Salary: जानें कैसे बनते हैं राम मंदिर के पुजारी और कितनी मिलती है इन्हें सैलरी? जानकर रह जाएंगे दंग


अयोध्या – अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। आज विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर राम मंदिर के मुख्य शिखर पर केसरिया ध्वज का विधिवत आरोहण किया जाएगा। मान्यता है कि त्रेतायुग में इसी तिथि को भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के शिखर पर यह पवित्र ध्वज फहराएंगे।

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राम मंदिर में पुजारी बनने की क्या है प्रक्रिया?

मंदिर का निर्माण पूरा होने और पूजा व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर इतने प्रतिष्ठित मंदिर में पुजारी कैसे बनते हैं। राम मंदिर में पुजारी की नियुक्ति श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा की जाती है।

पुजारी बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएं और प्रक्रिया आवश्यक है:

  • शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार के पास संस्कृत, वेद, शास्त्र और पूजा विधि का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। अधिकतर पुजारी आचार्य या शास्त्री स्तर की शिक्षा प्राप्त होते हैं।
  • अनुभव और आचरण: बड़े मंदिर में पूजा का अनुभव, शांत और अनुशासनपूर्ण जीवन और उच्च धार्मिक आचरण को भी प्राथमिकता दी जाती है।
  • चयन प्रक्रिया:
    • उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाता है।
    • उन्हें पूजा विधि का प्रैक्टिकल टेस्ट भी देना होता है।
    • इन सभी चरणों के बाद ही अंतिम चयन किया जाता है।

राम मंदिर के पुजारियों को कितनी मिलती है सैलरी?

रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में पुजारियों और मंदिर कर्मियों के वेतन में बड़ा बदलाव किया है जिससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिली है:

पद मासिक वेतन (प्रति माह)
प्रधान पुजारी लगभग ₹35,000
सहायक पुजारी ₹33,000
भंडारी और कोठारी ₹24,000
नए भंडारी की नियुक्ति ₹19,000
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अन्य वित्तीय प्रावधान:

  • ट्रस्ट ने तय किया है कि मंदिर की पूजा व्यवस्था में लगे कर्मचारियों के वेतन से फंड भी काटा जाएगा ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।
  • सालाना वेतन वृद्धि की प्रक्रिया भी शुरू की गई है जिससे स्टाफ और पुजारियों के वेतन में नियमित बढ़ोतरी होती रहेगी।

यह कदम सुनिश्चित करता है कि मंदिर की सेवा में लगे कर्मचारी भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें।


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