आज है धनतेरस! सोना-चांदी खरीदने से पहले जानें शुभ समय, पूजा विधि और धार्मिक महत्व - Balaji 36 News

आज है धनतेरस! सोना-चांदी खरीदने से पहले जानें शुभ समय, पूजा विधि और धार्मिक महत्व


रायपुर। दिवाली के पंचपर्व की शुरुआत धनत्रयोदशी यानी धनतेरस से होती है। इस दिन धन, सौभाग्य और आरोग्य की देवी-देवताओं की पूजा का विशेष विधान है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को मनाया जाएगा। यह तिथि न केवल पूजा बल्कि सोना-चांदी, बर्तन और वाहन की खरीददारी के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जा रही है।

सनातन परंपरा के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस कहा जाता है। यह पर्व भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, कुबेर देव, यमराज और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से पूजन करता है, उसके घर में पूरे वर्ष समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है।

धनतेरस की पूजा एवं खरीददारी का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर दोपहर 01:51 बजे तक रहेगी।
पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय: शाम 07:16 से 08:20 बजे तक (प्रदोष काल एवं वृषभ काल)।

धनतेरस पर सोने की खरीददारी का शुभ समय

  • अमृत काल: सुबह 08:50 से 10:33 बजे तक

  • प्रदोष काल: शाम 05:48 से 08:20 बजे तक

  • वृषभ काल: शाम 07:16 से 09:11 बजे तक
    इन समयों में सोना, चांदी, वाहन या कोई भी मूल्यवान वस्तु खरीदना शुभ फलदायक रहेगा।

धनतेरस का चौघड़िया मुहूर्त

दिन का चौघड़िया:

  • शुभ: प्रातः 07:49 से 09:15 बजे तक

  • चर: दोपहर 12:06 से 01:32 बजे तक

  • लाभ: दोपहर 01:32 से 02:57 बजे तक

  • अमृत: दोपहर 02:57 से शाम 04:23 बजे तक

रात्रि का चौघड़िया:

  • लाभ: सायंकाल 05:48 से 07:23 बजे तक

  • शुभ: सायंकाल 08:57 से रात्रि 10:32 बजे तक

  • अमृत: रात्रि 10:32 से 19 अक्टूबर पूर्वाह्न 12:06 बजे तक

  • चर: 19 अक्टूबर पूर्वाह्न 12:06 से 01:41 बजे तक

धनतेरस पर दीपदान का महत्व

हिंदू परंपरा में धनतेरस के दिन 13 दीपक जलाने की परंपरा है।

  • एक दीया यमराज के नाम से दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।

  • एक दीया माता लक्ष्मी के लिए।

  • दो दीपक मुख्य द्वार के दोनों ओर।

  • एक दीपक तुलसी के पौधे के पास।

  • एक छत पर तथा शेष दीपक पीपल या मंदिर परिसर में जलाए जाते हैं।
    मान्यता है कि ऐसा करने से घर में वर्षभर सुख, शांति और धन-समृद्धि बनी रहती है।


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