भिलाई। कथा के होमद भागवत कथा के तुतीय दिवस में मौ चैतन्य मीरा ने बताया कि समुद्र मंथन के चौदहरलो मै हो रहन गयाता और शेस मानव के लिएथे। यता, हमें प्रतिदिन न से सेवा अवश्य करनी चाहिए ये बारी जिम्मदारी है। क्योंकी दूधष मुनि भी कहते हैं कि जहाँ जी सेवा होती है वहाँ पर कलभूग का प्रभाव भी नहीं पड़ता। इसलिए हमेशा पहली रोटरी गो माता को देना चाहिए ताकि घर में हमेशा संस्कार और संस्कृति बनी रहे। पेचगध्य के सेवन से से ही बहुत सारी बिमारियों दूर हो जाती है। कच्या के माध्यम से शुरू मो ने बताया कि कलयुगा स्थान दिए गए हैं जहाँ गलत कार्य नशा व्यस्त वे हा है या फिर गलत तरिके से कमाए गए स्वर्ग में भी मलयुग का वास है। अता हो यदि कलयुग के प्रभाव से दूर रहना है तो मन को स्वस्थ रखना हो और इसलिए आपका अन्न भी स्वच्क होना चाहिए क्योंकी कहा गया है जैसा खाभोये अन्न वैसा होगा भन। और कलयुवा नेती परिक्षित जी को भी नही छोड़ा। इम्मिलिट्रगी कुरषि ने परिक्षित जी को सात दिवस में मृत्यु का द्वाप दे दिया। परन्तु जब परिक्षित जी पर कलयुग का प्रभाव समाप्त हुआ इन्धेने अपने राजसी वेशका को व्याग कर गया जिनारे


चले गए। तुम माँ ने साथ ही कपिल उपाख्याने, शिवचरित्र, भूमचरित और अजामिल कथा प्रसंग के माध्यम से सभी को भाव-विभारकर दिया