प्राचार्य पदोन्नति केस में आज हो सकता है बड़ा फैसला: हाईकोर्ट में फाइनल सुनवाई की संभावना, शाम 4 बजे फिर होगी सुनवाई - Balaji 36 News

प्राचार्य पदोन्नति केस में आज हो सकता है बड़ा फैसला: हाईकोर्ट में फाइनल सुनवाई की संभावना, शाम 4 बजे फिर होगी सुनवाई


रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित प्राचार्य पदोन्नति मामले में आज बड़ा अपडेट सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में लंबित याचिका WPS 3997/2025 — नारायण प्रकाश तिवारी बनाम छत्तीसगढ़ शासन की सुनवाई आज सुबह न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की कोर्ट में होनी थी, लेकिन याचिकाकर्ता की अधिवक्ता के स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह 10:40 बजे तक अदालत में उपस्थित नहीं हो सकीं।

इस बीच प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से इंटरवीनर याचिका के अधिवक्ता श्री आलोक बख्शी और श्री राहुल झा कोर्ट में उपस्थित हुए और इस केस को दोबारा सुनने के लिए निवेदन किया। न्यायमूर्ति अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसे आज ही फाइनल डिस्पोजल के लिए दोपहर 4 बजे सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

गौर करने वाली बात यह है कि यह केस सुनवाई के लिए सूची में 104वें स्थान पर था, लेकिन विशेष प्रयासों के बाद इसे पांचवें नंबर पर मेंशन कराकर सूची में लाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब इस मामले के निपटारे की दिशा में निर्णायक पहल हो रही है।

फोरम की ओर से जताई गई उम्मीद:
छत्तीसगढ़ प्राचार्य पदोन्नति फोरम के संयोजक अनिल शुक्ला ने बताया कि यदि आज यह मामला अंतिम रूप से निपट जाता है तो शासन द्वारा प्राचार्य पदस्थापना की प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। यह निर्णय सैकड़ों वरिष्ठ व्याख्याताओं के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा, जो वर्षों से प्राचार्य बनने की प्रतीक्षा में हैं।

क्या है मामला?
इस याचिका में प्राचार्य पदोन्नति को लेकर उठे विवाद और नियमों की व्याख्या से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय में विचार चल रहा है। लंबे समय से यह मामला लंबित है, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया अटकी हुई है।

आज का दिन हो सकता है निर्णायक:

  • सुबह की सुनवाई टली, अब दोपहर 4 बजे फिर से होगी पेशी

  • स्वास्थ्य कारणों से याचिकाकर्ता पक्ष अनुपस्थित

  • इंटरवीनर अधिवक्ताओं की सक्रियता से पुनः सुनवाई तय

  • फाइनल डिस्पोजल की उम्मीद

अब सबकी निगाहें दोपहर 4 बजे की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति की राह स्पष्ट हो सकती है। यह फैसला प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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