दुर्ग/ शहर विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं केवल दुर्ग के 60 वार्डों में सिमटी हुई हैं। कांग्रेस के अरुण वोरा वर्तमान में यहां से विधायक हैं। अगर् बात करें विधानसभा क्षेत्र में पिछले साढ़े चार साल में आए बदलाव की तो ,


जनता ने जिसे अपना प्रतिनिधि चुना जिससे दुर्ग शहर के विकास कि बदलती तस्वीर, देखनी चाही मगर मिला केवल आश्वासन जितना विकास नहीं उससे दुगने तिगुने केवल अश्वासन मिले है| मामला चाहे दुर्ग के विकास ,प्रशासन व्यवस्था और निर्माण की बात हो, किंतु वर्तमान परिदृश्य वास्तविकता बयां कर रही है और दुर्ग की जनता की आशा टूट चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि ने, उनके विकास कार्यों और समस्याओं के निराकरण अब तक नहीं किया है उनकी चर्चा में यह बात सामने आई कि शहर में जितना विकास हुआ है, उससे अधिक विकास कार्यों को लेकर केवल आश्वासन ही मिला है। पिछले चुनाव में क्षेत्र में औद्योगिक इकाईयां स्थापित करने की बात कही गई थी, ताकि शहर के युवाओं को रोजगार मिले, लेकिन इस दिशा में अब तक किसी तरह की पहल नहीं की गई।दुर्ग पटरीपार में कॉलेज और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का वादा अब तक अधुरा है।हालही मे राज्य कि जारी कुपोषण रिपोर्ट ने नेता जी कि पोल खोल दी। जिसमें दुर्ग जिले में 10566 बच्चे कुपोषित,जो दुर्ग जिले के लिए शर्मनाक बात है। इतना शिक्षित ज़िला होने के बावजूद ऐसी स्थिति है। इसका मुख्य कारण केवल कुप्रशासन और लाचार व्यवस्था है।
विगत साढे चार वर्षो मे यहां कोई ऐसा उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ जिससे शहर और जनता का भला हो। विधायक शहर के लिए
योजना नहीं बना सके। भाजपा की पूर्व परिषद ने जो योजनाएं बनाई थी और शासन से राशि लाई गई थी, उन्हीं योजनाओं पर काम चल रहा है। विधायक शहर में घूम-घूम कर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन घोषणाओं के मुताबिक राशि नहीं ला पाए। शहरवासी पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी जूझ रहे हैं।
दुर्ग की जनता ने दुर्ग के विकास और कल्याण की आश लगायी लेकिन विधायक जी ने साढे 4 साल में दुर्ग को आखिरी दिया क्या? कहा हैं औद्योगिक क्षेत्र?, कहाँ है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र? कहाँ है स्कूल और कॉलेज? पेयजल कि वयवस्था?? कहाँ है वाटर फ़िल्टर प्लांट?? कहा है ही विकास के कार्य?? कहां है ठगड़ा बांध का कार्य?? कहां है तालाब सौंदर्यीकरण?? का कार्य कहां है नगरी प्रशासन की अच्छी व्यवस्था?? कहां है क्लिनिक?? कहां है आपके किए गए घोषणाओं के वादे ??कहां गए कर्मचारियों के नियमितिकरण? ? हर साल दुर्ग जिले का बजट का आकार बढ़ता जा रहा है और साथ ही साथ इनकी की काली कमाई भी बढ़ती जा राही है धरातल पर कुछ नहीं रहा है केवल सारे बजट के पैसे जेब मे भरे जा रहे हैं विगत साढ़े 4 में दुर्ग जनता विकास के नाम पर और पिछे जा चुकी है उनकि कोई भी समस्या का निदान या हल नहीं मिला है अब इन सभी विफल कार्यों में डमर की परत पर चढा कर अपने किए गए नाकाम कार्यों को छुपाने के लिए काली डमर चढ़ाने का शिलान्यास कर अधुरे कार्यों का अंत कर रही है। दुर्ग कि जनता इसका जवाब जरूर देगी।