Property : जमीन और जायदाद में क्या अंतर होता है ? आइए जाने दोनों का फर्क ?


Property : जमीन-जायदाद के बीच क्या अंतर होता है इसको लेकर आज हम आपको अहम जानकारी देने जा रहें है। अक्सर आपने सुन होगा की जमीन-जायदाद का झगड़ा चल रहा है। लेकिन क्या आपने जानते है कि जमीन और जायदाद दो अलग-अलग चीजें है, न कि एक?

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Zameen-and-Jaydaad जमीन, जैसा कि नाम से ही साफ है यह भूमि का एक या अधिक टुकड़े हो सकते हैं। यह एक अचल संपत्ति है, जिसका भूगोल, आकार और सीमा स्पष्ट तौर से निर्धारित होती है। जमीन में खेत, बाग, रिहायशी भूमि, व्यापारिक भूमि आदि शामिल हो सकती है। इसे खरीदा बेचा जा सकता है और लीज पर भी दिया जा सकता है।

जायदाद, इसे अंग्रेजी में प्रॉपर्टी या एसेट (Property/Assets) कहते हैं। जमीन के मुकाबले जायदाद व्यापक है। जायदाद में भूमि (जमीन) शामिल हो सकती है। इसमें चल संपत्तियां (जैसे वाहन, आभूषण, बैंक बैलेंस, शेयर, आदि) तो होती ही हैं, साथ ही में अचल संपत्तियां (जैसे भूमि, भवन, मकान, अपार्टमेंट, आदि) भी शामिल किए जाते हैं। Zameen-and-Jaydaad

कानून के हिसाब से?

Zameen-and-Jaydaad भारतीय कानून में जायदाद (Property) के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की संपत्तियां आती हैं।

अचल संपत्ति : भूमि और उस पर बनी इमारतें (जैसे मकान, अपार्टमेंट, दुकानें, कमर्शियल परिसर आदि)। जमीन का स्वामित्व होता है, उसे खरीदा-बेचा जा सकता है और किराए पर भी दिया जा सकता है। Immovable Property में अन्य संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं जैसे कि जलाशय, पार्क, और वन भूमि आदि। Zameen-and-Jaydaad

चल संपत्ति : इसमें वाहन, बैंक बैलेंस, आभूषण, नगदी, शेयर, बॉन्ड्स, सामान आदि शामिल हैं। Movable Property वह संपत्ति होती है, जो स्थान बदल सकती है, जैसे कि वाहन, मशीनरी, या अन्य व्यक्तिगत चीजें। Zameen-and-Jaydaad

मैनेजमेंट और ऑनरशिप

भारत में जायदाद के मैनेजमेंट और ऑनरशिप को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कानूनी व्यवस्थाएं हैं। भारतीय संपत्ति कानून इनमें से एक है। दूसरा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, तीसरा मुस्लिम पर्सनल लॉ है। इसके अलावा राजस्व कानून और भूमि अधिग्रहण कानून, और संपत्ति अधिनियम 1993 भी हैं।

Zameen-and-Jaydaad भारतीय संपत्ति कानून : Indian Property Law, भारतीय संपत्ति अधिनियम 1882 के तहत आता है, जो अचल संपत्ति के हस्तांतरण और संपत्ति संबंधित अन्य मामलों को नियंत्रित करता है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) भी संपत्ति के लेन-देन और अन्य कानूनी पहलुओं को नियंत्रित करते हैं।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act, 1956): यह कानून हिंदू परिवारों में संपत्ति के वितरण के लिए लागू होता है। इसमें संपत्ति के स्वामित्व और उत्तराधिकार से संबंधित नियम निर्धारित किए गए हैं। Zameen-and-Jaydaad

भूमि के स्वामित्व और उसे सरकारी उद्देश्यों के लिए अधिग्रहण करने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून (Land Acquisition Act) और अन्य संबंधित कानून लागू होते हैं। Zameen-and-Jaydaad

संपत्ति का हस्तांतरण अधिनियम, 1993 (The Transfer of Property Act, 1882): यह कानून संपत्ति के हस्तांतरण, बिक्री, किराए पर देने, लीज पर देने, और अन्य संबंधित मामलों को नियंत्रित करता है।


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