श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में एक दिवसीय बोनसाई कला कार्यशाला का आयोजन


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श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी, भिलाई के वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण एवं रचनात्मक कौशल विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय बोनसाई कला कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बोनसाई कला के विशेषज्ञ एवं छत्तीसगढ़ बोनसाई सोसायटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री अनिल वर्मा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में विद्यार्थियों को बोनसाई कला की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सजल सजू देवो तथा बोनसाई संस्था से जुड़ी श्रीमती अर्चना पारेकर भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं उद्बोधन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य *डॉ. अर्चना झा* ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बोनसाई कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बोनसाई प्रकृति की सुंदरता को छोटे स्वरूप में सहेजने की एक अनूठी कला है। यह कला हमें धैर्य, अनुशासन, निरंतर देखभाल एवं प्रकृति के प्रति समर्पण का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में रचनात्मकता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें पौधों एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने तथा प्रकृति से जुड़कर सीखने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय के डीन एकेडमिक *डॉ. जे. दुर्गा प्रसाद राव* ने अपने संबोधन में बोनसाई कला के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं तथा उनकी रचनात्मक सोच और कौशल को विकसित करने में सहायक होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्साहपूर्वक भाग लेने और इस कला के माध्यम से प्रकृति के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला के मास्टर ट्रेनर श्री अनिल वर्मा ने बोनसाई कला के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बोनसाई केवल वृक्षों को छोटे आकार में विकसित करने की कला नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन, समर्पण एवं सौंदर्यबोध का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को बोनसाई पौधों के चयन, उनकी देखभाल, आकार निर्धारण तथा उन्हें आकर्षक स्वरूप प्रदान करने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि *डॉ. सजल सजू देवो* ने बोनसाई कला विषय पर ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बोनसाई कला के विभिन्न पहलुओं, इसके वैज्ञानिक आधार, पौधों के विकास तथा उनके कलात्मक स्वरूप को बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को बोनसाई कला को वैज्ञानिक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने उनके व्याख्यान से महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं तथा पौधों के संरक्षण के प्रति अपनी रुचि को और अधिक विकसित किया।

कार्यक्रम में श्रीमती अर्चना पारेकर, जो बोनसाई संस्था से जुड़ी हुई हैं, की भी विशेष उपस्थिति रही। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को बोनसाई कला की बारीकियों को समझने तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों सहित उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों को बोनसाई निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं, पौधों की देखभाल, छंटाई, आकार निर्धारण तथा उनके कलात्मक विकास के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर *कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।*

इस अवसर पर अतिथि विशेषज्ञ श्री अनिल वर्मा एवं डॉ. सजल सजू देवो का सम्मान किया गया। कार्यशाला के सफल आयोजन में वनस्पति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमती कांछी लता साहू ,विभाग के सदस्यों एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विद्यार्थियों के उत्साह, सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह एक दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने तथा पारंपरिक कला को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की दिशा में एक सार्थक पहल रही। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को पौधों की सुंदरता, उनके संरक्षण और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया।

*वनस्पति शास्त्र विभाग*
*श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी, भिलाई*


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