भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी, भिलाई द्वारा माइक्रोबायोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, उस्मानाबाद, महाराष्ट्र के सहयोग से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चिखली, दुर्ग में एंटीबायोटिक प्रतिरोध विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को एंटीबायोटिक प्रतिरोध की बढ़ती समस्या, उसके कारणों, दुष्परिणामों तथा रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक करना था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग तथा मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा में सूक्ष्मजीव विज्ञान के महत्व से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष सुश्री रचना तिवारी ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध विषय पर एक ज्ञानवर्धक एवं विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध वह स्थिति है, जिसमें बैक्टीरिया उन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जो सामान्यतः उन्हें नष्ट करने या उनकी वृद्धि रोकने में सक्षम होती हैं।
अपने व्याख्यान में उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बिना आवश्यकता एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन, स्वयं से दवाएँ लेना, चिकित्सकीय परामर्श के बिना एंटीबायोटिक का उपयोग तथा उपचार संबंधी निर्देशों का पालन न करना इस समस्या को बढ़ावा दे सकते हैं।
सुश्री रचना तिवारी ने तुलसी, अदरक एवं हल्दी जैसे प्राकृतिक पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये स्वास्थ्य की देखभाल में सहायक होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे इस जानकारी को अपने परिवार एवं समाज के अन्य लोगों तक पहुँचाएँ और जनस्वास्थ्य जागरूकता के प्रसार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।
यह कार्यक्रम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा तथा युवा पीढ़ी को जागरूक एवं सशक्त बनाने के विचारों से प्रेरित था। यह जागरूकता कार्यक्रम वैज्ञानिक जानकारी को दैनिक जीवन की स्वास्थ्य संबंधी आदतों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कल्पना अग्रवाल, शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध एवं प्राकृतिक उपचारों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछ कर विषय के प्रति अपनी समझ को और अधिक विकसित किया। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली बनाया। चिखली, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कल्पना अग्रवाल ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावशाली बताया।
श्री शंकराचार्य महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्चना झा ने इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम समाज को एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डीन एकेडमिक्स डॉ. जे. दुर्गा प्रसाद राव ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक जीवन में वैज्ञानिक जानकारी के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इस जागरूकता कार्यक्रम के सफल आयोजन में सुश्री वैभवी सहारे एवं सुश्री मानसी भुट्टे एवं विद्यार्थियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन का समापन विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं आयोजकों के सहयोग के साथ हुआ।