एक्सटेम्पोर मोटिवेशनल टॉक पर रिपोर्ट_विशेष अतिथि-डॉ कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम_


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स्थान -एमजीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 6 भिलाई_

विद्यालय के एम.पी. हॉल में आज प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमणियन के प्रेरणादायक एक्सटेम्पोर मोटिवेशनल टॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जीवन में सफलता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ राजकीय गान अरपा पैरी के धान… से हुई। इसके उपरांत सचिव मैडम मैरी साजन ने अपना स्वागत भाषण दिया।

हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ़ बिजनेस (आईएसबी) में वित्त के प्रोफेसर ,भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ,भारतीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी निदेशक और हमारे एमजीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 1989 बैच के 12वीं के गौरवशाली पूर्व छात्र डॉ .कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम द्वारा एक तात्कालिक प्रेरक भाषण टीचर्स और 11वीं तथा 12वीं के छात्रों को सुनने का अवसर मिला।
इस कार्यक्रम में विद्यालय के माननीय उपाध्यक्ष, परम आदरणीय शाजी एम. बेबी, कोरिएपिसकोपा, माननीय कॉरस्पॉडेंट श्री सुरेश जेकोब, सम्मानित कोषाध्यक्ष डॉ. सैमसन सैमुअल,विद्यालय समिति के सदस्य श्री बिजू आइप, श्री भावेश सैम और श्री के पी थॉमस के साथ-साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति, आई.एस.बी के प्रवेश निदेशक श्री भरतानंद कंदुला, सह निदेशक डॉ. श्रीधर भगवतुल्ला, एम.जी.एम के सम्मानित प्रधानाचार्य रेव. फादर जेम्स गीवर्गीस, प्रधानाध्यापिका श्रीमती अनीता राजन, द्वितीय पाली प्रभारी श्रीमती सोमी सजीव, पी.पी.डबलू इंचार्ज जीना शिवम मैम, आदि उपस्थित थे।
माननीय श्री सुरेश जैकब , तथा प्रधानाचार्य ने सभा का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमणियन द्वारा दिया गया तात्कालिक प्रेरक भाषण था।
उन्होंने अपने भाषण के कुछ प्रमुख सूत्र में आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत को
अपना दोस्त बनाने के लिए प्रेरित किया।
तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने को कहा।

वक्ता ने अपने निजी अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे स्कूल के दिनों में ही उन्हें आईआईटी में पढ़ाई करने की इच्छा जागी। उन्होंने छात्रों को लगातार प्रयास करते रहने, हिम्मत न हारने, तथा हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस सत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि छात्रों को तुरंत परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। विलंबित संतुष्टि की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला गया।
सभा के साथ उनके संवाद ज्ञानवर्धक और प्रेरक होने के साथ-साथ मित्रवत थे। विद्यार्थी भी उनके संवादों के साथ सहज दिखाई दिए।

प्रेरणादायक सत्र के बाद, कृतज्ञता और प्रशंसा के प्रतीक के रूप में विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिन्ह के रूप में एक बस्तर आर्ट कलाकृति, व शॉल भेंट की गई।
श्रीमती उमा कुमार ने धन्यवाद प्रस्तावित करते हुए अतिथि, प्रबंधन, प्रधानाचार्य, स्टाफ सदस्यों और कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

यह आयोजन छात्रों और कर्मचारियों के लिए एक सार्थक और ज्ञानवर्धक अनुभव रहा, जिसने दर्शकों को प्रेरित किया और उन्हें आत्मविश्वास, समर्पण और दृढ़ता के साथ अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।


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