दुर्ग, 21 सितम्बर 2026/ जब शासन की नीतियां सीधे आम नागरिक के संघर्षों को आसान बनाने लगें, तो वह केवल कागजी योजना नहीं रह जाती, बल्कि लोगों की जिंदगी बदलने का सशक्त माध्यम बन जाती है। नगर पालिका निगम रिसाली के ग्राम डुंडेरा वार्ड क्रमांक 35 में रहने वाले चेलाराम साहू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भिलाई स्टील प्लांट में कार्य करके वर्ष में करीब 80,000 रुपये अर्जित करने वाले चेलाराम अपने 3 सदस्यों के परिवार (पत्नी और एक छोटी बेटी) के साथ कच्चे व खपरैल वाले घर में रहने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने और बंदरों द्वारा खपरैल तहस-नहस कर देने के कारण उन्हें बार-बार मरम्मत में काफी पैसे खर्च करने पड़ते थे। इस बदहाली का सबसे बुरा असर उनकी छोटी बिटिया पर पड़ता था, जो नमी के कारण बीमार पड़ जाती थी और उसकी पढ़ाई-लिखाई व सोने में भारी दिक्कतें आती थीं।
बिटिया की चिंता से परेशान चेलाराम साहू को जब नगर निगम से प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जमा कर आवेदन किया। योजनांतर्गत 2.66 लाख रुपये की स्वीकृत लागत (जिसमें केंद्रांश 1.50 लाख, राज्यांश 0.665 लाख एवं हितग्राही अंशदान 0.495 लाख रुपये शामिल है) से उनका पक्का मकान एक साल के भीतर बनकर तैयार हो गया। दरअसल, जनसेवा और सुशासन के प्रति यही प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस कार्यशैली को दर्शाती है, जिसने बीते 25 वर्षों में देश में जन-जनकल्याण के नए मानदंड स्थापित किए हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां हर गरीब के सपनों को नया संबल दे रही हैं। पक्का घर बनने पर चेलाराम साहू ने प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आवास ने उनके सिर पर सुरक्षित छत दी है, साथ ही यह उनकी नन्ही बेटी की मुस्कान और पूरे परिवार की खुशियों का आधार भी बनी है।
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